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भारत का इतिहास

भारत का इतिहास कई हजार वर्ष पुराना माना जाता है। 65,000 साल पहले, पहले आधुनिक मनुष्य, या होमो सेपियन्स, अफ्रीका से भारतीय उपमहाद्वीप में पहुंचे थे, जहां वे पहले विकसित हुए थे। सबसे पुराना ज्ञात आधुनिक मानव आज से लगभग 30,000 साल पहले दक्षिण एशिया में रहता है। 6500 ईसा पूर्व के बाद, खाद्य फसलों और जानवरों के वर्चस्व के लिए सबूत, स्थायी संरचनाओं का निर्माण और कृषि अधिशेष का भंडारण मेहरगढ़ और अब बलूचिस्तान के अन्य स्थलों में दिखाई दिया। ये धीरे-धीरे सिंधु घाटी सभ्यता में विकसित हुए, दक्षिण एशिया में पहली शहरी संस्कृति, जो अब पाकिस्तान और पश्चिमी भारत में २५००-१९ ०० ई.पू. के दौरान पनपी। मेहरगढ़ पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है जहां नवपाषाण युग (७००० ईसा-पूर्व से २५०० ईसा-पूर्व) के बहुत से अवशेष मिले हैं। सिन्धु घाटी सभ्यता, जिसका आरम्भ काल लगभग ३३०० ईसापूर्व से माना जाता है, प्राचीन मिस्र और सुमेर सभ्यता के साथ विश्व की प्राचीनतम सभ्यता में से एक हैं। इस सभ्यता की लिपि अब तक सफलता पूर्वक पढ़ी नहीं जा सकी है। सिन्धु घाटी सभ्यता वर्तमान पाकिस्तान और उससे सटे भारतीय प्रदेशों में फैली थी। पुरातत्त्व प्रमाणों के आधार पर १९०० ईसापूर्व के आसपास इस सभ्यता का अकस्मात पतन हो गया।
१९वी शताब्दी के पाश्चात्य विद्वानों के प्रचलित दृष्टिकोणों के अनुसार आर्यों का एक वर्ग भारतीय उप महाद्वीप की सीमाओं पर २००० ईसा पूर्व के आसपास पहुंचा और पहले पंजाब में बस गया और यहीं ऋग्वेद की ऋचाओं की रचना की गई। आर्यों द्वारा उत्तर तथा मध्य भारत में एक विकसित सभ्यता का निर्माण किया गया, जिसे वैदिक सभ्यता भी कहते हैं। प्राचीन भारत के इतिहास में वैदिक सभ्यता सबसे प्रारंभिक सभ्यता है जिसका सम्बन्ध आर्यों के आगमन से है। इसका नामकरण आर्यों के प्रारम्भिक साहित्य वेदों के नाम पर किया गया है। आर्यों की भाषा संस्कृत थी और धर्म "वैदिक धर्म" या "सनातन धर्म" के नाम से प्रसिद्ध था, बाद में विदेशी आक्रांताओं द्वारा इस धर्म का नाम हिन्दू पड़ा।
वैदिक सभ्यता सरस्वती नदी के तटीय क्षेत्र जिसमें आधुनिक भारत के पंजाब (भारत) और हरियाणा राज्य आते हैं, में विकसित हुई। आम तौर पर अधिकतर विद्वान वैदिक सभ्यता का काल २००० ईसा पूर्व से ६०० ईसा पूर्व के बीच में मानते है, परन्तु नए पुरातत्त्व उत्खननों से मिले अवशेषों में वैदिक सभ्यता से संबंधित कई अवशेष मिले है जिससे कुछ आधुनिक विद्वान यह मानने लगे हैं कि वैदिक सभ्यता भारत में ही शुरु हुई थी, आर्य भारतीय मूल के ही थे और ऋग्वेद का रचना काल ३००० ईसा पूर्व रहा होगा, क्योंकि आर्यों के भारत में आने का न तो कोई पुरातत्त्व उत्खननों पर अधारित प्रमाण मिला है और न ही डी एन ए अनुसन्धानों से कोई प्रमाण मिला है। हाल ही में भारतीय पुरातत्व परिषद् द्वारा की गयी सरस्वती नदी की खोज से वैदिक सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और आर्यों के बारे में एक नया दृष्टिकोण सामने आया है। हड़प्पा सभ्यता को सिन्धु-सरस्वती सभ्यता नाम दिया है, क्योंकि हड़प्पा सभ्यता की २६०० बस्तियों में से वर्तमान पाकिस्तान में सिन्धु तट पर मात्र २६५ बस्तियां थीं, जबकि शेष अधिकांश बस्तियां सरस्वती नदी के तट पर मिलती हैं, सरस्वती एक विशाल नदी थी। पहाड़ों को तोड़ती हुई निकलती थी और मैदानों से होती हुई समुद्र में जाकर विलीन हो जाती थी। इसका वर्णन ऋग्वेद में बार-बार आता है, यह आज से ४००० साल पूर्व भूगर्भी बदलाव की वजह से सूख गयी थी।
ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६वीं शताब्दि सदी में जैन और बौद्ध धर्म सम्प्रदाय लोकप्रिय हुए। अशोक (ईसापूर्व २६५-२४१) इस काल का एक महत्वपूर्ण राजा था जिसका साम्राज्य अफगानिस्तान से मणिपुर तक और तक्षशिला से कर्नाटक तक फैल गया था। पर वो सम्पूर्ण दक्षिण तक नहीं जा सका। दक्षिण में चोल सबसे शक्तिशाली निकले। संगम साहित्य की शुरुआत भी दक्षिण में इसी समय हुई। भगवान गौतम बुद्ध के जीवनकाल में, ईसा पूर्व ७ वीं और शुरूआती ६ वीं शताब्दि के दौरान सोलह बड़ी शक्तियां (महाजनपद) विद्यमान थे। अति महत्‍वपूर्ण गणराज्‍यों में कपिलवस्‍तु के शाक्‍य और वैशाली के लिच्‍छवी गणराज्‍य थे। गणराज्‍यों के अलावा राजतंत्रीय राज्‍य भी थे, जिनमें से कौशाम्‍बी (वत्‍स), मगध, कोशल, कुरु, पान्चाल, चेदि और अवन्ति महत्‍वपूर्ण थे। इन राज्‍यों का शासन ऐसे शक्तिशाली व्‍यक्तियों के पास था, जिन्‍होंने राज्‍य विस्‍तार और पड़ोसी राज्‍यों को अपने में मिलाने की नीति अपना रखी थी। तथापि गणराज्‍यात्‍मक राज्‍यों के तब भी स्‍पष्‍ट संकेत थे जब राजाओं के अधीन राज्‍यों का विस्‍तार हो रहा था। इसके बाद भारत छोटे-छोटे साम्राज्यों में बंट गया।
आठवीं सदी में सिन्ध पर अरबों का अधिकार हो गया। यह इस्लाम का प्रवेश माना जाता है। बारहवीं सदी के अन्त तक दिल्ली की गद्दी पर तुर्क दासों का शासन आ गया जिन्होंने अगले कई सालों तक राज किया। दक्षिण में हिन्दू विजयनगर और गोलकुंडा के राज्य थे। १५५६ में विजय नगर का पतन हो गया। सन् १५२६ में मध्य एशिया से निर्वासित राजकुमार बाबर ने काबुल में पनाह ली और भारत पर आक्रमण किया। उसने मुग़ल वंश की स्थापना की जो अगले ३०० सालों तक चला। इसी समय दक्षिण-पूर्वी तट से पुर्तगाल का समुद्री व्यापार शुरु हो गया था। बाबर का पोता अकबर धार्मिक सहिष्णुता के लिए विख्यात हुआ। उसने हिन्दुओं पर से जज़िया कर हटा लिया। १६५९ में औरंग़ज़ेब ने इसे फ़िर से लागू कर दिया। औरंग़ज़ेब ने कश्मीर में तथा अन्य स्थानों पर हिन्दुओं को बलात मुसलमान बनवाया। उसी समय केन्द्रीय और दक्षिण भारत में शिवाजी के नेतृत्व में मराठे शक्तिशाली हो रहे थे। औरंगज़ेब ने दक्षिण की ओर ध्यान लगाया तो उत्तर में सिखों का उदय हो गया। औरंग़ज़ेब के मरते ही (१७०७) मुगल साम्राज्य बिखर गया। अंग्रेज़ों ने डचों, पुर्तगालियों तथा फ्रांसिसियों को भगाकर भारत पर व्यापार का अधिकार सुनिश्चित किया और १८५७ के एक विद्रोह को कुचलने के बाद सत्ता पर काबिज़ हो गए। भारत को आज़ादी १९४७ में मिली जिसमें महात्मा गांधी के अहिंसा आधारित आंदोलन का योगदान महत्वपूर्ण था। १९४७ के बाद से भारत में गणतांत्रिक शासन लागू है। आज़ादी के समय ही भारत का विभाजन हुआ जिससे पाकिस्तान का जन्म हुआ और दोनों देशों में कश्मीर सहित अन्य मुद्दों पर तनाव बना हुआ है।

स्रोत 

प्राचीन भारत का इतिहास समान्यत विद्वान भारतीय इतिहास को एक संपन्न पर अर्धलिखित इतिहास बताते हैं पर भारतीय इतिहास के कई स्रोत है। सिंधु घाटी की लिपि, अशोक के शिलालेख, हेरोडोटस, फ़ा हियान, ह्वेन सांग, संगम साहित्य, मार्कोपोलो, संस्कृत लेखकों आदि से प्राचीन भारत का इतिहास प्राप्त होता है। मध्यकाल में अल-बेरुनी और उसके बाद दिल्ली सल्तनत के राजाओं की जीवनी भी महत्वपूर्ण है। बाबरनामा, आईन-ए-अकबरी आदि जीवनियां हमें उत्तर मध्यकाल के बारे में बताती हैं।

जोधपुर जिले की सम्पूर्ण जानकारी | Jodhpur District GK in Hindi | जोधपुर जिला Rajasthan GK in Hindi

राजस्थान जिला दर्शन : 'जोधपुर जिला दर्शन'

'थार मरुस्थल का प्रवेशद्वार' एवं 'सूर्य नगरी' के उपनाम से प्रसिद्ध जोधपुर शहर की स्थापना 1459 ईस्वी में राठौड़ शासक राव जोधा ने की थी। जोधपुर में मेहरानगढ़ दुर्ग जिसे जोधपुर दुर्ग भी कहा जाता है, का निर्माण भी 1459 ईसवी में चिड़िया टूंक पहाड़ी पर करवाया गया था। इसी पहाड़ी के पास वर्तमान जोधपुर शहर बसाया गया एवं इसे अपनी राजधानी बनाया गया। जोधपुर में 1814 ईसवी में नगर परिषद बनी। जोधपुर का क्षेत्रफल : 22850 वर्ग किलोमीटर हैं। 


                      जोधपुर जिले के उपनाम/प्राचीन नाम


  • मारवाड़ 
  • मरुधर 
  • थार मरुस्थल का प्रवेश द्वार 
  • सूर्य नगरी (Sun City)
  • मरुवाड़ 
  • मरुकांतार प्रदेश
  • राजस्थान की ब्ल्यूसिटी 


जोधपुर जिले की अक्षांशीय/देशांतरीय स्थिति


  • अक्षांशीय स्थिति : 26 डिग्री उत्तरी अक्षांश 27 डिग्री 37 मिनट उत्तरी अक्षांश तक। 
  • देशांतरीय स्थिति : 72 डिग्री 55 मिनट पूर्वी देशांतर से 73 डिग्री 52 मिनट पूर्वी देशांतर तक। 

2011 की जनगणना के आंकड़े 

  • जोधपुर की कुल जनसँख्या : 36,87,165
  • जोधपुर में जनसँख्या घनत्व : 161 
  • जोधपुर का लिंगानुपात : 916 
  • जोधपुर की साक्षरता दर : 65.94 प्रतिशत 

जोधपुर जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार


  • नाग पंचमी का मेला - यह मेला मंडोर (जोधपुर) में भादवा सुदी पंचम को भरता है। 
  • धींगागवर बेतमार मेला - यह मेला जोधपुर में वैशाख कृष्ण तृतीया को भरता है। 
  • वीरपुरी का मेला - यह मेला मंडोर (जोधपुर) में श्रावण मास के अंतिम सोमवार को भरता है। 
  • बाबा रामदेव जी का मेला - बाबा रामदेव जी का यह मेला मसूरिया (जोधपुर) में भादवा सुदी दूज को भरता है। 
  • फलौदी मेला - यह मेला फलोदी (जोधपुर) में माघ सुदी नवमी को भरता है। 
  • कापरड़ा पशु मेला - यह मेला कापरड़ा (जोधपुर) में पौष सुदी 8 से 13 तक भरता है। 
  • खेजड़ी वृक्ष मेला - यह मेला जोधपुर के खेजड़ली में भादवा शुक्ला दशमी को आयोजित होता है। 
  • पाबूजी  का मेला - कोलू गांव (फलोदी, जोधपुर) में चैत्र अमावस्या को भरता है। 
  • चामुंडा माता का मेला - इनके मंदिर में आश्विन शुक्ल नवमी को जोधपुर दुर्ग में एक प्रसिद्ध मेला लगता है। 

जोधपुर के प्रमुख मंदिर | जोधपुर के शीर्ष मंदिर


  • सच्चियाँ माता का मंदिर, ओसियां - ओसिया (जोधपुर) में स्थित सच्चियाँ माता के इस मंदिर में माता की पूजा हिंदुओं और ओसवालों  द्वारा समान रूप से की जाती है। सचियां माता का मंदिर महिषमर्दिनी की सजीव प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। 
  • अधरशिला रामदेव मंदिर - यह मंदिर जालोरिया का बास, जोधपुर में एक सीधी चट्टान पर स्थित है। यह मंदिर बाबा रामदेव का मंदिर है। 
  • महामंदिर, जोधपुर - जोधपुर का यह महामंदिर नाथ सम्प्रदाय का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है। इसका निर्माण 1812 ईसवी में जोधपुर नरेश महाराजा मानसिंह द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर 84 खंभों पर निर्मित है। इसलिए यह पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही आकर्षक मंदिर है।
  • संबोधीधाम, जोधपुर - कायलाना झील के पास जोधपुर में स्थित इस धाम का निर्माण जैन धर्मावलंबियों द्वारा करवाया गया था।


जोधपुर जिले के दर्शनीय स्थल/पर्यटन स्थल


  • खींचन गांव, जोधपुर - जोधपुर के फलौदी के पास स्थित खींचन गांव डेमोसिल क्रेन (आप्रवासी कुरजाँ) पक्षियों के लिए बहुत ही प्रसिद्ध है।
  • फलौदी (जोधपुर) - फलौदी के निकट बाप क्षेत्र (जोधपुर) नमक उत्पादन के लिए जाना जाता है , जहां पर निजी क्षेत्र का कारखाना है। 
  • मेहरानगढ़ दुर्ग - मेहरानगढ़ दुर्ग का निर्माण 1459 ईस्वी में राव जोधा ने करवाया था। इस दुर्ग की नींव का पत्थर करणी माता (रिद्धि बाई) ने रखा था। मेहरानगढ़ दुर्ग के उपनाम - सूर्यगढ़, चिड़िया टूंक दुर्ग, मयूरध्वजगढ़, गढ़ चिंतामणि, कागमुखी आदि। इस दुर्ग में प्रमुख दर्शनीय स्थल - चामुंडा माता का मंदिर, सूरी मस्जिद, भूरे खां की मजार, मानप्रकाश पुस्तकालय, कीरत सिंह एवं धन्ना की छतरियां, फूलमहल, मोतीमहल, जहूर खान की मजार आदि। इस दुर्ग में गजनी खां, शंभूबाण तथा किलकिला नामक 3 तोपे पर रखी हुई है। इस दुर्ग के बारे में रुडयार्ड क्लिपिंग ने कहा "इसका निर्माण शायद परियों व फरिस्तों ने किया है"। मेहरानगढ़ दुर्ग का शाही पुस्तकालय 'पुस्तक प्रकाश' भवन के नाम से जाना जाता है। 
  • उम्मेद भवन/छीतर पैलेस - इसका निर्माण 1929 ईस्वी में उम्मेदसिंह ने अकाल राहत के लिए करवाया था। यह यूनानी/इटैलिक एवं गैथिक शैली/इंडो सरासैनिक में बना हुआ है। 
  • जसवंत थड़ा - जोधपुर के महाराजा जसवंत सिंह द्वितीय की याद में उनके उत्तराधिकारी राजा सरदार सिंह द्वारा 1906 निर्मित यह शाही स्मारक सफेद संगमरमर से बना हुआ है। इसे राजस्थान का ताजमहल भी कहा जाता है। 
  • अरना-झरना - जोधपुर में स्थित यह एक प्राकृतिक जलप्रपात है। 
  • एक थम्बा महल - इसे प्रहरी मीनार भी कहा जाता है। इसका निर्माण अजित सिंह ने बनाया था। 
  • राजस्थान उच्च न्यायालय - राजस्थान उच्च न्यायालय के भवन का निर्माण 1935 ईस्वी में इंग्लैंड के राजा जॉर्ज पंचम के शासनकाल की रजत जयंती की स्मृति में जोधपुर नरेश उमेदसिंह द्वारा करवाया गया था। 
  • चौखा महल - यह मारवाड़ चित्र शैली एवं जन-जीवन के चित्रों की अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध है। 
  • बुलानी महल - यह महल वर्तमान में एक अस्पताल के रूप में संचालित है। 
  • मंडोर - यहां रावण ने मंदोदरी से विवाह किया (रावण की चंवरी/फेरे का मंडप) | 
  • रानी सूर्य कंवर की छतरी - यह 32 खम्भों की छतरी है। 
  • अखैराज सिंघवियों की छतरी - यह 20 खम्भों की छतरी हैं। 
  • पंचकुंड की छतरियां - मंडोर में यहां पर राठोड़ों की छतरियां स्थापित है। इसमें से सबसे पुराणी रावगांगा की छतरी है।
  • प्रधानमंत्री राजसिंह चम्पावत की छतरी - जोधपुर के महाराजा जसवंतसिंह ने अपने प्रधानमंत्री राजसिंह चम्पावत की याद में 18 खम्भों की यह छतरी बनवाई थी। 
  • खेजड़ली, जोधपुर - यह गांव वृक्ष प्रेम के लिए पुरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां पर 1730 में जोधपुर नरेश अभयसिंह के समय अमृता देवी एवं साथियों ने वृक्षों को काटने से  रोकने के लिए अपने प्राणों  का बलिदान दिया था। इस गांव में शहीद स्मारक बना हुआ हैं।
  • जोधपुर के अन्य पर्यटन स्थान - बिजोलाई के महल, फतेह महल, मोतीमहल, तख्तविलास, दौलतखाना तलहटी महल, फूलमहल, राइका बैग पैलेस, सूरसागर महल, इन्द्रराज सिंधी की छतरी, मामा-भांजा की छतरी, कागा की छतरी, गोरा धाय की छतरी आदि। 

जोधपुर की प्रमुख अकादमियां 

  • केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसन्धान - (CAZRI - Central Arid Zone Research Institute) जोधपुर जिले में है। इसकी स्थापना 1959 में जोधपुर में की गयी। 
  • शुष्क वन अनुसन्धान केंद्र - (AFRI - Arid Forest Research Institute ) इसकी स्थापना भी जोधपुर में 1985 में की गयी थी। 
  • राजस्थान संगीत नाटक अकादमी - इसकी स्थापना 1957 में जोधपुर में की गयी। 
  • रूपायन शोध संस्थान ( बोरून्दा ) - इसकी स्थापना 1960 में जोधपुर में की गयी।  इसका कार्य राजस्थानी कला का संचय करना है।
  • प्राविधिक शिक्षा निदेशालय - इसकी स्थापना 17 अगस्त, 1956 में जोधपुर में की गयी। 
  • राजस्थान प्राच्य विद्या संस्थान - इसकी स्थापना 1950-51 में जोधपुर में की गयी। यह राजस्थान का सबसे बड़ा पाण्डुलिपि भंडार ग्रह है। 
  • जोधपुर के अन्य सांस्कृतिक केंद्र एवं संसथान - राजस्थान ओरिएंटल अनुसन्धान संस्थान,  सीमा सुरक्षा बल का फ्रंटियर मुख्यालय (जोधपुर में), मीरा बाई अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), राजस्थान उच्च न्यायालय, राजस्थान शोध संस्थान, राष्ट्रीय कला मंडल।  


जोधपुर में मीठे पानी की झीलें 

  • कायलाना झील (जोधपुर) -  यह झील जोधपुर से लगभग 8 किलोमीटर पूर्व में है। यह झील शुरू में एक प्राकृतिक झील थी। इसको वर्तमान स्वरूप सर प्रताप सिंह ने 1872 में दिया था। इस झील से जोधपुर शहर को जलापूर्ति की जाती है। वर्तमान में इस झील में "राजीव गाँधी केनाल" का पानी आता है। माचिया सफारी पार्क भी कायलाना झील के किनारे स्थित है। इंडोलाई का तालाब जोधपुर जिले में स्थित है, जहां डोलोमाइट पाया जाता है। यही पर कागा की छतरियां है। 
  • बाल समंद झील (जोधपुर) - यह झील जोधपुर-मंडोर मार्ग पर जोधपुर में स्थित हैं। इसका निर्माण 1159 ईस्वी में परिहार शासक राव बाउक (बालक राव प्रतिहार) ने करवाया था। इस झील के बीच में महाराजा सुरसिंह ने अष्ट खम्भा महल का निर्माण करवाया था। 
  • सरदार समंद झील - इस झील का निर्माण महाराजा उम्मेदसिंह द्वारा जोधपुर जिले में करवाया गया।  


जोधपुर जिले में प्रमुख विश्वविद्यालय 

  • डॉ. एस. राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय - इसका निर्माण 2002 में करवड़ (जोधपुर) में किया गया। यह राजस्थान का प्रथम आयुर्वेद विश्वविद्यालय तथा भारत का दूसरा आयुर्वेद विश्वविद्यालय है। भारत का पहला आयुर्वेद विश्वविद्यालय जामनगर (गुजरात) में है। 
  • जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय - जोधपुर में इस विश्वविद्यालय की स्थापना 1962 की गयी। शुरुआत में इस विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र जोधपुर शहर तक ही था लेकिन बाद में सिरोही को छोड़कर पुरे जोधपुर संभाग तक कार्यक्षेत्र हो गया। यह एक पूर्णत: आवासीय विश्व विद्यालय है। 
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय - इसकी स्थापना 2001-02 में जोधपुर में की गयी। यह राजस्थान का प्रथम विधि विश्वविद्यालय है।  इसके कुलाधिपति राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते है। 
  • जोधपुर में अन्य प्रमुख विश्वविद्यालय - सरदार पटेल पुलिस सुरक्षा एवं दाण्डिक न्याय विश्वविद्यालय, स्कुल ऑफ़ डेजर्ट साइंस, आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) का केंद्र, एनर्जी खनन और पेट्रोलियम विश्व विद्यालय, फुटवियर डिजाइन एवं डवलपमेंट इंस्टिट्यूट आदि प्रमुख विश्वविद्यालय हैं। 


जोधपुर के प्रमुख जंतुआलय/मृगवन 

  • माचिया सफारी मृगवन - इसकी स्थापना 1985 में की गयी। यह मृगवन जोधपुर से 5 किलोमीटर दूर कायलाना झील के पास ही स्थापित है। इस पार्क में माचिया दुर्ग स्थित है। यहां पर राज्य एवं देश का प्रथम 'राष्ट्रीय मरु वानस्पतिक उद्यान' बनाया गया है। 
  • अमृता देव कृष्ण मृगवन - यह मृगवन खेजड़ली गांव (जोधपुर) में अमृता देवी के नाम पर स्थापित किया गया। 
  • जोधपुर जंतुआलय - इसकी स्थापना 1936 में जोधपुर में की गयी। यहां पर राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण का कृत्रिम प्रजनन केंद्र है। 


जोधपुर की प्रमुख लोकदेवियाँ 

  • सचियां माता - यह ओसवालों की कुलदेवी है। इन्हें सांप्रदायिक सद्भाव की देवी भी कहा जाता है। इनके मंदिर का निर्माण प्रतिहार शैली में परमार राजकुमार उपलदेव ने 11 वीं शताब्दी में ओसियां (जोधपुर) में करवाया था। 
  • आई माता - इनका जन्म अंबापुर (गुजरात) में हुआ था। इनके बचपन का नाम जीजाबाई था। यह सीरवी जाति के क्षत्रियों की कुलदेवी हैं। इनका प्रसिद्ध मंदिर बिलाड़ा (जोधपुर) में है। आई माता के मंदिर को दरगाह भी कहा जाता है तथा इनके थान को बड़ेर कहते हैं। इनके मंदिर में मूर्ति नहीं है। इनके मंदिर में जलने वाले दीपक की ज्योति से केसर टपकती है। 
  • नागणेची माता - नागणेची माता राठौड़ वंश की कुलदेवी है। इनका प्रमुख मंदिर मंडोर (जोधपुर) में है। यह 18 भुजाधारी देवी है। 
  • लुटियाला/लटियाला माता - यह कल्लों की कुलदेवी हैं। इनका प्रमुख मंदिर फलोदी (जोधपुर) में है। इस मंदिर के आगे खेजड़ी वृक्ष स्थित है। इसलिए इन्हें 'खेजड़ बेरी रेाय भवानी' भी कहा जाता है। 
  • चामुंडा माता - मारवाड़ के राठोड़ों की इष्ट देवी हैं। इनका मंदिर मेहरानगढ़ (जोधपुर) में है।

जोधपुर के प्रमुख सम्प्रदाय 

  • रामस्नेही संप्रदाय की खेड़ापा शाखा - रामस्नेही संप्रदाय की खेड़ापा शाखा के संस्थापक रामदास जी थे। 
  • तेरापंथी संप्रदाय - जैन श्वेतांबर के तेरापंथी संप्रदाय के संस्थापक आचार्य भिक्षु स्वामी थे।  जिनका जन्म कंटालिया गांव (जोधपुर) में हुआ था। 
  • माननाथी संप्रदाय - इसके प्रवर्तक नाथमुनि थे। इसके प्रधान पीठ महामंदिर (जोधपुर) में हैं। नाथपंथ के प्रथम गुरु गोरखनाथ थे। 


जोधपुर के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न/तथ्य 

  • बिरला व्हाइट सीमेंट उद्योग - इसकी स्थापना खारिया खंगार (भोपालगढ़) जोधपुर में की गयी। यह राजस्थान का सबसे बड़ा सफेद सीमेंट का कारखाना है। 
  • राजस्थान के जोधपुर जिले की आकृति मयूराकार है। 
  • विश्व का एकमात्र खेजड़ली वृक्ष मेला जोधपुर में भरता है। 
  • विश्व का सबसे बड़ा रिहायशी महल - 'छीतर महल/उम्मेद भवन' जोधपुर में है। 
  • जोधपुर चित्र शैली -  जोधपुर चित्रकला शैली की विशेषताएं - रेत के टीले, कौए, चिंकारा, ऊँट,  घोड़े,छोटी-छोटी झाड़ियां आदि का चित्रण। इस शैली का स्वर्णकाल मालदेव के शासनकाल में था। यह शैली नाथ सम्प्रदाय से सम्बंधित है। जोधपुर शैली के प्रमुख चित्रकार - देवदास, शिवदास, रामा, नाथा, छज्जू और सैफू आदि। जोधपुर लघु चित्रकला को हाथ से तैयार किया गया है। यह चित्रकला शैली ऊँट की पीठ पर ढोला और मरू जैसे प्रसिद्ध प्रेमियों के दृश्यों को दर्शाती है। मारवाड़ शैली में 'रागमाला चित्रावली' का चित्रांकन वीरजी ने 1623 ईस्वी में किया था। 
  • देश का प्रथम कोयला आधारित बिजली घर 'बाप' जोधपुर में है। 
  • भारत का प्रथम राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, 'मण्डौर' जोधपुर में है। 
  • देश का प्रथम मरु वानस्पतिक उद्यान (माचिया सफारी पार्क में) जोधपुर में है। 
  • भारत का प्रथम सौर ऊर्जा चलित फ्रिज 'बालेसर' जोधपुर में है। 
  • देश की प्रथम खजूर पौधशाला का निर्माण चौपासनी (जोधपुर) में है। 
  • देश का सबसे बड़ा पाण्डुलिपि भंडार 'राजस्थान प्राच्य विद्या संसथान' जोधपुर में है। 
  • जोधपुर की प्रमुख हस्तकलाएं - बादला (जस्ते से निर्मित ठन्डे पानी के बर्तन), मोजड़ियां, साफा,  हाथी दांत की चूड़ियां, बंधेज का कार्य, चमड़े के बटवे, मलमल का कार्य (मथानियाँ गांव में), मोठड़ा (लुगदी पर किया हुआ कार्य) आदि। 
  • देश का पहला रेलवे मेडिकल कॉलेज जोधपुर में है। 
  • राजस्थान का पहला सरकारी डाकघर 1839 ईस्वी में जयपुर में है। 
  • राजस्थान में निजी क्षेत्र का प्रथम इनलैंड कंटेनर डीपो जोधपुर में है। 
  • राजस्थान का प्रथम हेरिटेज होटल, फ्लाइंग क्लब, जीरा मंडी, एयरफोर्स फ़्लाइंग कॉलेज, सूर्य उद्यान, आईआईटी केंद्र आदि जोधपुर में है। 
  • खंभाहीन शहर (Pole Less ) जोधपुर है। 
  • ई. पेशी से जुड़ने वाला पहला जिला जोधपुर जिला है। 
  • देश एवं राजस्थान का प्रथम ऑनलाइन जिला न्यायालय - जोधपुर जिला न्यायालय है। 
  • प्रथम स्पाईस (मसाला) पार्क रामपुरा भाटियान गांव (ओसियां) जोधपुर में है। 
  • उत्तरी भारत व राजस्थान में रावण का पहला मंदिर - मंडोर (जोधपुर) में है। 
  • राजस्थान में जीवों की रक्षार्थ पहला बलिदान 1604 ईस्वी में कर्मा एवं गौरा के नेतृत्व में रामासड़ी गांव (जोधपुर) में है। 
  • राजस्थान का सर्वाधिक ऊन उत्पादक जिला - जोधपुर जिला। 
  • राजस्थान का सर्वाधिक आखेट निषिद्ध क्षेत्र वाला जिला - जोधपुर जिला। 
  • राजस्थान में सर्वाधिक शुष्क स्थान - फलौदी (जोधपुर) है। 
  • जोधपुर जिला जोधपुर संभाग के अंतर्गत आता है। जोधपुर संभाग में इसके अलावा अन्य जिले - जैसलमेर, बाड़मेर, जालोर, सिरोही तथा पाली जिले है। 
  • जोधपुर के प्रमुख बांध एवं बावड़ियां - तख्तसागर, उम्मेदसागर, कातन बावड़ी (ओसियां), तापी बावड़ी, महिला बाग़ का झालरा (यहां महिलाओं द्वारा 'लोटियों का मेला' लगता है। 
  • लालमिर्च के लिए जोधपुर का मथानियां क्षेत्र प्रसिद्ध है। 
  • बादामी पत्थर जोधपुर जिले से प्राप्त होता है। 
  • मारवाड़ महोत्स्व -  शरद पूर्णिमा (सितंबर-अक्टूबर) में जोधपुर में आयोजित होता है। 
  •  मारवाड़ी भेद वंश का अनुसन्धान केंद्र जोधपुर जिले में है। 
  • गोमठ ऊँट वंश - ऊँट की यह नस्ल सवारी हेतु प्रसिद्ध है। यह नस्ल मुलत: फलौदी (जोधपुर) में पायी जाती है। 
  • मांगलिया मेहाजी - यह कामड़िया पंथ से दीक्षित थे। इनका मुख्य मंदिर बापनी (जोधपुर) में है। जहां पर प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को मेला भरता है। इनका घोडा 'किरड़ काबरा' है। 
  • तल्लीनाथजी - इनका जन्म शेरगढ़ (जोधपुर) में हुआ था। इनका वास्तविक नाम गांगदेव राठौड़ था। इनके भाई - रावचूड़ा, पिता - वीरमदेव, गुरु - जालंधर नाथ थे। तल्लीनाथजी जालोर क्षेत्र के लोकदेवता है। इनका जालोर के पांचोटा गांव में पंचमुखी पहाड़ी पर पूजा स्थल है। 
  • रुपनाथजी - ये पाबूजी के भतीजे थे। इनका जन्म जोधपुर के कोलू गांव हुआ था। इनकी हिमाचल प्रदेश में बालकनाथ के रूप में पूजा की जाती है। कोलुमण्ड (जोधपुर) में इनका प्रमुख थान है। 
  • जोधपुर की मस्जिदे/दरगाह/मकबरे -  गुलाब खां, इक मीनार मस्जिद, सूरी मस्जिद, गूलर कालूदान की मीनार(मेहरानगढ़ दुर्ग में), गुलाब कलंदर का मकबरा, गमता गाजी मीनार, भूरे खां की मजार, तना पीर की दरगाह (मंडोर) | 
  • जोधपुर की प्रमुख हवेलियां - राखी हवेली, पुष्य हवेली, पोकरण हवेली, पच्चीसां, बड़े मियां की हवेली। 
  • जोधपुर के रियासत कालीन सिक्के - भीमशाही सिक्के, विजयशाही सिक्के, लल्लुलिया सिक्के, गधिया सिक्के, फदिया सिक्के, ढब्बुशाही सिक्के आदि। 
  • मारवाड़ किसान आंदोलन - चांदमल सुराणा व जयनारायण व्यास के नेतृत्व में मादा पशुओं के निष्कासन व तोल के विरुद्ध हुआ था। 
  • मारवाड़ प्रजामण्डल - 1934 ईस्वी में जोधपुर में मारवाड़ प्रजामण्डल की स्थापना जयनारायण व्यास ने की थी तथा इसकी अध्यक्ष भंवरलाल सर्राफ बने। 
  • मारवाड़ लोक परिषद - इसका गठन 1938 ईस्वी में सुभाष चंद्र बोस ने किया था। इसके बाद में इसका नेतृत्व जयनारायण व्यास को सौपा। इसका मुख्य उद्देश्य महाराज की छत्र-छाया में उत्तरदायी शासन की स्थापना करना था। 
आज के इस पोस्ट में हमने "राजस्थान के जिला दर्शन" की श्रृंखला में "जोधपुर जिला दर्शन" को पूरी तरह से कवर करने की पूरी कोशिश की हैं। इसमें जोधपुर का सामान्य परिचय, जोधपुर के उपनाम, 2011 की जनगणना के अनुसार जोधपुर जिले की जनसँख्या/साक्षरता/घनत्व/लिंगानुपात,जोधपुर का क्षेत्रफल, जोधपुर की मानचित्र में स्थिति, जोधपुर में विधानसभा क्षेत्र, जोधपुर के मेले, जोधपुर के प्रमुख मंदिर, जोधपुर के पर्यटन स्थल, जोधपुर में उद्योग-धंधे, जोधपुर में प्राचीन सभ्यता, जोधपुर की प्रमुख हस्तकलाएं, जोधपुर में प्रमुख विश्वविद्यालय, जोधपुर में खनिज सम्पदा एवं इसके अलावा जितने भी अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न बन सकते थे, उन सभी को शामिल कर पेश किया गया है। मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी पाठकों को मेरी यह पोस्ट पसंद आयी होगी। आप सभी को यह पोस्ट कैसी लगी आप मुझे कमेंट करके जरूर बताएं।  


राजस्थान की प्रमुख पंचवर्षीय योजनाएं

राजस्थान की पंचवर्षीय योजनाएं - यहां पर राजस्थान की पहली  पंचवर्षीय योजना, दूसरी  पंचवर्षीय योजना, तृतीय  पंचवर्षीय योजना, चतुर्थ  पंचवर्षीय योजना, 5 वीं  पंचवर्षीय योजना, छठी  पंचवर्षीय योजना, 7 वीं  पंचवर्षीय योजना, 8 वीं  पंचवर्षीय योजना, 9 वीं  पंचवर्षीय योजना, 10 वीं  पंचवर्षीय योजना, 11 वीं  पंचवर्षीय योजना, 12 वीं  पंचवर्षीय योजना तथा 13 वीं  पंचवर्षीय योजना से सम्बंधित आंकड़े दिए गए है।

राजस्थान की प्रमुख पंचवर्षीय योजनाएं

① प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) -

प्रथम पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य के अन्तर्गत कृषि उत्पादन में वृद्धि करना, शक्ति के साधनों को बढ़ाना, जलापूर्ति की व्यवस्था करना, सिंचाई की सुविधाओं का विस्तार करना तथा मूलभूत सामाजिक सेवाओं का विस्तार करने के लिए शिक्षा प्रदान करना था। खाद्यान्न का उत्पादन 3.30 लाख टन बढ़ गया, साथ ही कपास का उत्पादन लक्ष्य से अधिक हुआ। इस योजना काल में सिंचित क्षेत्र 15.93 लाख हैक्टेयर हो गया और विद्युत उत्पादन 34,000 किलोवाट हो गया। सड़कों की लम्बाई 13,988 मील हो गई। इसी पंचवर्षीय योजना के दौरान चम्बल एवम् भाखड़ा नाँगल बहुउद्देश्यीय योजनाओं के अलावा 11 वृहद् व मध्यम परियोजनाओं तथा 244 लघु एवम् सिंचाई परियोजनाओं पर कार्य शुरू किए गए।

② दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) -

द्वितीय पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की अत्यधिक मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना था जो प्रथम योजनाकाल में पूर्ण की जानी थी। विद्युत की प्रस्तावित क्षमता 138.8 मेगावाट आवंटित की गई। प्रथम रूप से शक्ति एवम् सिंचाई पर इस योजनाकाल में ध्यान दिया गया। इसके साथ ही भूमि सुधार कार्यक्रम, सामाजिक सेवाओं के विकास, कृषि एवम् औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि और राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के विकास पर अधिक बल दिया गया। 1960-61 में खाद्यान्नों का वास्तविक उत्पादन 45.4 लाख टन हुआ। 

③ तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66) -

इस तृतीय पंचवर्षीय योजना को वित्तीय साधनों की कमी के कारण दो भागों में विभक्त किया गया- प्रथम—महत्त्वपूर्ण परियोजनाएँ जिन पर 209 करोड़ रुपये व्यय किए जाने थे और, द्वितीय - अन्य कार्यक्रम जो उस समय प्रारम्भ किए जाने थे। इस योजनाकाल के दौरान देश को पाकिस्तान (1965) तथा चीन (1962) के विरुद्ध दो युद्ध झेलने पड़े। इस कारण देश व राज्य की आर्थिक व्यवस्था काफी प्रभावित हुई। कुल सिंचित क्षेत्र 1960-61 में 43.38 लाख एकड़ था, वह 1965-66 में बढ़कर 51.41 लाख एकड़ हो गया। इस योजनाकाल में विकास कार्यक्रमों पर वास्तविक व्यय 212.63 करोड़ रुपये हुआ और प्रस्ताव राशि 236 करोड़ रुपये योजना के लिए प्रस्तावित थी। इस योजना के अन्त में विद्युत क्षमता 65 मेगावाट से बढ़कर 96 मेगावाट हो गई। 1965-66 में राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय 385 रुपये थी। तीन एकवर्षीय योजनाएँ (1966-69)—भारत में आपातकालीन स्थिति को देखते हुए चौथी पंचवर्षीय योजना को स्थगित करना पड़ा और उसके स्थान पर वार्षिक योजना का सम्पादन ही देश के लिए हितकर समझा गया।

④ चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (1969-74) -

इस चौथी पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत विकास कार्यों पर 306.21 करोड़ रुपये प्रस्ताव में लाए गए परन्तु वास्तविक व्यय 308.79 करोड़ रुपये हुआ। राज्य में सूखा सम्भाव्य क्षेत्र, डेयरी विकास व कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रमों को शुरू किया गया। इस योजना में क्षेत्र विकास की अवधारणा पर बल देते हुए पुनः सर्वोच्च प्राथमिकता सिंचाई और शक्ति को ही दी गई। सिंचाई एवम् शक्ति को ऊँची प्राथमिकता देने का कारण कृषि एवम् उद्योगों को बढ़ाना था। राज्य में केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनियोग की राशि 1966-69 में 17 करोड़ रुपये से बढ़कर 1973-74 में 100 करोड़ हो गई। राजस्थान राज्य की इस योजना से विद्युत क्षमता 174 मेगावाट से बढ़कर 452 मेगावाट हो गई। 1968-69 में कुल सिंचाई क्षेत्रफल 21.2 हैक्टेयर था जो बढ़कर 1973-74 में 26.2 लाख हैक्टेयर हो गया।

⑤ पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-78)—

इस योजना काल में 847.16 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रावधान था किन्तु वास्तविक व्यय इससे कहीं अधिक 857.16 करोड़ रुपये का हुआ। इस योजना में भूमिगत जल को विशेष रूप से प्रयोग करने पर जोर दिया गया, क्योंकि राज्य में सतह के जल की मात्रा सीमित है। क्षेत्रिय विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत जनजाति क्षेत्र के लिए एक विशिष्ट योजना का निर्माण किया जाने लगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विकास को बढ़ाने के लिए आर्थिक आधार मजबूत करना था। कुल सड़क की लम्बाई 40,339 किलोमीटर हो गई। इस दौरान न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम शुरू किया गया। सकल सिंचित क्षेत्रफल 30.4 लाख हैक्टेयर हो गया। विद्युत प्रस्तावित क्षमता 800.78 मेगावाट से बढ़कर 959.60 मेगावाट हो गई।

⑥ छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85)—

इस छठी पंचवर्षीय योजना की शुरूआत 1 अप्रैल, 1980 को हुई। इस योजना की अनुमोदित व्यय राशि 2025 करोड़ रुपये थी, किन्तु इसमें वास्तविक व्यय 2130.70 करोड़ रुपये हुए। छठी योजना के दौरान विद्युत क्षमता 1713.17 मेगावाट हो गई। इस योजना के अन्त तक 58 प्रतिशत गाँव विद्युतीकृत हो चुके थे। इस योजना में निर्धानता निवारण हेतु समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम एवम् ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक रोजगार गारन्टी कार्यक्रम' आरम्भ किए गए। राज्य में कृषि उत्पादनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।

⑦ सप्तमी पंचवर्षीय योजना (1985-90) -

राजस्थान में सातवीं पंचवर्षीय योजनावधि में 3016.2 करोड़ रुपये व्यय हुए। इस योजना में उत्पादक रोजगार के सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इस योजना में आर्थिक प्रगति के अन्तर्गत उतार-चढ़ाव आते रहे। खाद्यान्नों का उत्पादन 1987-88 में 48 लाख टन था जो वर्ष 1988-89 में बढ़कर 106.6 लाख टन हो गया। विद्युत शक्ति की प्रस्तावित क्षमता वर्ष 1989-90 के अन्त तक 2711.42 मेगावाट तक पहुंच गई। राज्य में 1980-81 के मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय 1397 रुपये से बढ़कर 1742 रुपये हो गयी। इस योजनाकाल में ग्रामीण उद्योगों का उत्पादन 120 करोड़ रुपये से अधिक रिकॉर्ड किया गया। सड़कों की कुल लम्बाई 56,956 किमी. हो गई। वार्षिक योजनाएँ (1990-1992) सातवीं योजना की समाप्ति पर 1 अप्रैल, 1990 से देश की आठवीं पंचवर्षीय योजना शुरू नहीं की जा सकी।  राज्य में अच्छी वर्षा के कारण खाद्यान्न का उत्पादन रिकार्ड 108.68 लाख टन हुआ। राजस्थान राज्य में देश की भाँति 1990-91 एवम् 1991-92 की दो वार्षिक योजनाएँ बनाई गईं। वर्ष 1990-91 की योजना पर 975.6 करोड़ रुपये एवम् 1991-92 में 1178.5 करोड़ रुपये की राशि व्यय हुई। राज्य में विद्युत की स्थापित क्षमता 1991-92 में 2775 मेगावाट हो गई। 1 जनवरी, 1991 से 'अपना गाँव अपना काम' योजना लागू की गई। प्रवासी राजस्थानियों से राज्य के विकास में योगदान प्राप्त करने के लिए 'राजस्थान विकास कोष' की स्थापना की गई।

⑧ आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-1997) - 

आठवीं पंचवर्षीय योजनाकाल में राज्य के विकास हेतु औद्योगिक नीति, 1994, नई खनिज नीति 1994 तथा सड़क विकास नीति, 1994 लागू की गई। राज्य का आठवीं योजना में सार्वजनिक क्षेत्र में वास्तविक व्यय लगभग 11998.97 करोड़ रुपये हुआ। योजना में कुल परिव्यय राशि का 45% अंश सिंचाई एवम् शक्ति पर व्यय किया गया। जिसमें प्रस्तावित व्यय का लगभग 62% ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर, 12.5% न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम पर व्यय हुआ। आठवीं योजना में 15 नए महाविद्यालय जिनमें 11 महाविद्यालय महिलाओं के लिए खोले गए, 5830 प्राथमिक विद्यालय,2649 उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले गए। जनजातीय विकास के लिए इस योजना के अन्तर्गत 1535 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

⑨ नवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) -

राज्य की नवीं योजना का आकार आठवीं योजना के आकार से दुगुने से भी अधिक है। योजनाकाल में 27,500 करोड़ रुपये का सार्वजनिक परिव्यय स्वीकृत किया गया। नवीं योजना में आर्थिक विकास के लिए आधारभूत ढाँचे का विकास करना। निर्यात प्रोत्साहन पर बल देना। समाज के पिछड़े वर्ग को ऊपर उठाना। अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों का विकास करना। मानवीय साधनों व क्षमता का विकास करना। इस तरह नवीं योजना में सम्पूर्ण रूप से निर्यात को बढ़ाने, सामाजिक क्षेत्र का विकास करने, आर्थिक ढाँचे को मजबूत करने, जल-संसाधनों के बेहतर उपयोग सम्बन्धी बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

⑩ राजस्थान की दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002- 2007) -

  • समय- 1अप्रेल 2002 ई.से 31 मार्च 2007 ई.
  • इसमें 31831.75 करोड़ रूपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था। जबकि 33735.74 करोड़ रूपये खर्च हुए।
  • राज्य की वार्षिक योजना (2003-2004) - राज्य की वार्षिक योजना 2003-2004 का आकार 4,258.00 करोड़ रुपए था, जिसे संशोधित कर 4370.80 करोड़ रुपए कर दिया गया जो कि राज्य की वर्ष 2002-03 की वार्षिक योजना 5622.92 से 1364.92 करोड़ रुपये कम है। राज्य की वार्षिक योजना 2003-04 में सर्वाधिक प्रस्तावित व्यय 1564.52 करोड़ रु, सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाओं पर रखा है जो कि प्रस्तावित योजना का 36.74 प्रतिशत है।

⑪ राजस्थान की 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) -

  • समय - 1अप्रेल 2007 ई.से 31 मार्च 2012 ई.
  • इसमें 71731.38 करोड रूपये की राशि खर्च करने का लक्ष्य रखा गया। जिसमें आर्थिक विकास का लक्ष्य 7.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया।
  • ऊर्जा क्षेत्र में - 35.70 प्रतिशत
  • परिवहन - 6.53 प्रतिशत
  • सामाजिक व सामुदायिक सेवाएँ-27.49 प्रतिशत
  • सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण - 10.18 प्रतिशत
  • कृषि व सम्बद्ध सेवाएं - 3.1 प्रतिशत
  • वास्तविक व्यय -  93950.73
  • सामान्य सेवाएं -  6.10 प्रतिशत
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रम -  5.99 प्रतिशत
  • प्राथमिक क्षेत्र में 3.5 प्रतिशत, द्वितीय क्षेत्र में 8 प्रतिशत तथा तृतीय क्षेत्र में 8.9 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया जो औसत 7.4 प्रतिशत था।


⑫ राजस्थान की 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) -

  • 6 इसमें 196992 करोड रूपये की राशि खर्च करने का लक्ष्य रखा गया। जिसमें आर्थिक विकास का लक्ष्य 7.70 प्रतिशत निर्धारित किया गया।
  • यह ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अनुमोदित व्यय की तुलना में 174 प्रतिशत अधिक है।
  • ऊर्जा क्षेत्र में -  36.92 प्रतिशत
  • परिवहन -  5.28 प्रतिशत
  • सामान्य सेवाएं -  .88 प्रतिशत
  • सामाजिक व सामुदायिक सेवाएं -  35.28 प्रतिशत
  • सिंचाई व बाढ नियंत्रण -  3.99 प्रतिशत
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रम -  9 प्रतिशत
  • उद्योग व खनिज में -  0.50 प्रतिशत
  • वैज्ञानिक सेवाओं में -  0.12 प्रतिशत
  • कृषि व सम्बद्ध सेवाएं - 5.57 प्रतिशत
  • विशिष्ट क्षेत्रीय कार्यक्रम में - 0.59 प्रतिशत
  • आर्थिक सेवाओं में -  1.87 प्रतिशत
  • प्राथमिक क्षेत्र में 3.0 प्रतिशत, द्वितीय क्षेत्र में 8 प्रतिशत तथा तृतीय क्षेत्र में 9.5 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया जो औसत 7.70 प्रतिशत था।

जालौर जिला दर्शन - जालौर जिले की सम्पूर्ण जानकारी




जालौर जिला दर्शन - जालौर जिले की सम्पूर्ण जानकारी


Jalore District GK in Hindi : राजस्थान जिला दर्शन की इस पोस्ट में जालौर जिला दर्शन को पूरा किया गया है। Jalore Zila Darshan - इस पोस्ट में जालौर जिले का सामान्य परिचय, जालौर जिले की अक्षांशीय एवं देशांतरीय स्थिति, जालौर जिले का क्षेत्रफल एवं उपनाम, जालौर के प्रमुख मंदिर, जालौर के पर्यटन स्थल दर्शनीय स्थल, जालौर जिले के खनिज, जालौर के प्रमुख मेले और त्यौहार एवं जालौर के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर आदि बिंदुओं को कवर करने की कोशिश की गयी है।
जालौर राजस्थान राज्य का एक ऐतिहासिक शहर है। यह शहर प्राचीनकाल में 'जाबालिपुर' के नाम से जाना जाता था। जालौर जिला मुख्यालय यहाँ स्थित है। लूनी नदी की उपनदी सुकरी के दक्षिण में स्थित जालौर राजस्थान का ऐतिहासिक जिला है। पहले बहुत बड़ी रियासतों मे एक थी। जालौर रियासत, चित्तौड़गढ़ रियासत के बाद मे अपना स्थान रखती थी। पश्चिमी राजस्थान ( राजपुताना ) मे प्रमुख रियासत थी। जालोर में कलबी समाज की जनसंख्या सबसे ज्यादा है

जालोर जिले का सामान्य परिचय

  • नाडोल के शासक अल्हण के पुत्र कीर्तिपाल चौहान ने परमारों  को हराकर जालौर में 1181 ईसवी में चौहान वंश की स्थापना की थी।
  •  जालौर जिले के उपनाम/प्राचीन नाम : ग्रेनाइट सिटी, जलालाबाद, जाबालीपुर, सुवर्ण नगरी।
  • जालौर जिले का क्षेत्रफल कितना है : 10640 वर्ग किलोमीटर।
  •  जालौर की अक्षांशीय स्थिति : 24 डिग्री 37 मिनट उत्तरी अक्षांश से 25 डिग्री 49 मिनट उत्तरी अक्षांश तक।
  •  जालौर की देशांतरीय स्थिति : 71 डिग्री 11 मिनट पूर्वी देशांतर से 73 डिग्री 5 मिनट पूर्वी देशांतर तक।

जालौर जिले के प्रमुख मेले और त्यौहार

 सेवड़िया पशु मेला : यह मेला जालौर के रानीवाड़ा क्षेत्र में चैत्र सुदी एकादशी से प्रारंभ होकर चैत्र पूर्णिमा तक चलता है।
 बाबा रघुनाथपुरी पशु मेला : यह मेला जालोर के सांचौर क्षेत्र में चेत्र सुदी एकादशी को भरता है।


जालौर जिले के प्रमुख मंदिर

  • मां आशापुरा का मंदिर
  • सुंधा माता का मंदिर
  • आपेश्वर महादेव मंदिर
  • फताजी का मंदिर
  • सिरे मंदिर
  • मलिक शाह पीर की दरगाह


जालौर जिले के पर्यटन स्थल

  • जालौर दुर्ग (सुवर्ण गिरी दुर्ग, कांचन गिरी दुर्ग, जलालाबाद, सोनारगढ़ दुर्ग, जाबालीपुर, सोनगिरी दुर्ग , जालंधर दुर्ग)
  • भीनमाल का वराह श्याम का मंदिर
  • भीनमाल
  • सांचौर


जालौर जिले के प्रश्नोत्तर | Jalore GK Questions

  1. राजस्थान का पहला गोमूत्र बैंक कहां है - सांचौर (जालौर) में।
  2. राष्ट्रीय कामधेनु विश्वविद्यालय कहां स्थित है - पथमेड़ा (सांचौर, जालौर) में।
  3. राजस्थान का वह जिला जिसकी आकृति व्हेल मछली के समान है - जालौर जिला।
  4. राजस्थान का औद्योगिक दृष्टि से सबसे पिछड़ा जिला कौन सा है - जालौर जिला।
  5. राजस्थान का प्रथम रोप-वे कहां स्थित है - सुंधा माताजी मंदिर, जालौर में।
  6. राजस्थान का न्यूनतम महिला साक्षरता वाला जिला कौन सा है - जालौर जिला।
  7. राजस्थान में इसबगोल (घोड़ा जीरा) मंडी कहां स्थित है - भीनमाल, जालौर में।
  8. राजस्थान का कौनसा जिला इसबगोल उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है - जालौर जिला।
  9. गुलाबी रंग का संगमरमर एवं ग्रेनाइट कहां से प्राप्त होता है - जालौर जिले से।
  10. राजस्थान में जीरे का सर्वाधिक उत्पादक जिला कौन सा है - जालौर जिला।
राजस्थान जिला दर्शन की इस पोस्ट में जालौर जिला दर्शन को पूरा किया गया है। Jalore Zila Darshan - इस पोस्ट में जालौर जिले का सामान्य परिचय, जालौर जिले की अक्षांशीय एवं देशांतरीय स्थिति, जालौर जिले का क्षेत्रफल एवं उपनाम, जालौर के प्रमुख मंदिर, जालौर के पर्यटन स्थल दर्शनीय स्थल, जालौर जिले के खनिज, जालौर के प्रमुख मेले और त्यौहार एवं जालौर के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर आदि बिंदुओं को कवर करने की कोशिश की गयी है। मुझे उम्मीद है कि आप सभी को यह पोस्ट पसंद आई होगी।

इतिहास को कैसे पढ़ें ताकि रहे सब कुछ याद | इतिहास का क्रमिक पाठ्यक्रम

राम राम सा ! मैं राणा राम भाटिया आज आपके लिए एक ऐसी पोस्ट लेकर आया हूँ जिसे आपने कहीं जगह खोजा होगा लेकिन आपको मिली नहीं होगी। आज मैं आपको इतिहास को कैसे पढ़े? इसके बारे में बताने वाला हूँ तो बने रहिये स्टडी राणा के साथ। 

सबसे पहले हम इतिहास को एक क्रमबद्ध तरीके से शेड्यूल  में बिठाना पड़ेगा ताकि हमारा ध्यान जो है जिस कल में चल रहा हैं वहां तक पहुँच सके। 

इतिहास का क्रमिक रूप से अध्यन

  • पाषण कल - पाषाण कल में पूरा पाषाण, मध्य पाषाण तथा नव पाषाण कल का अध्ययन 
  • सिन्धु घाटी सभ्यता- इसमें स्थल, स्थलों के खोजकर्ता , इनकी विशेषताए और इसका पतन कैसे हुआ, के बारे में अध्ययन 
  • वैदिक सभ्यता 
  • धार्मिक आन्दोलन - जैन  धर्म तथा बोद्ध धर्म के बारे में जानकारी का अध्ययन 
  • महाजनपद कल - मगध के बारे में विस्तृत ,हर्यक वंश, नाग वंश, नन्द वंश
  • मोर्यकाल - चन्द्रगुप्त, अशोक आदि के बारे में 
  • मोर्योतर काल जानकारी 
  • गुप्तकाल 
  • गुप्तोतर काल 
  • पूर्व मध्यकाल - राजपूतो का इतिहास , दक्षिण भारत का इतिहास - शोल वंश, पल्लव वंश चालुक्य वंश आदि। 
  • सल्तनत काल - गुलाम वंश, खिलजी वंश , तुगलक वंश, सैय्यद वंश, लोदी वंश आदि। 
  • मुग़ल काल 
  • विजयनगर साम्राज्य 
  • बहमनी साम्राज्य 
  • मराठा आन्दोलन 
  • धार्मिक आन्दोलन - धर्म सुधार , सूफी संत  आदि। 
  • विदेशियों का आगमन- मुगलों का पतन 
  • विदेशियों की साम्राज्य स्थापना 
  • विदेशियों द्वारा आर्थिक शोषण 
  • सामाजिक धार्मिक आन्दोलन 
  • 1857 की क्रांति 
  • स्वतंत्रता संघर्ष - किसान आंदोलन ,  जनजातीय आन्दोलन , स्वतंत्रता आन्दोलन। 
  • गवर्नर,गवर्नर जनरल,वायसराय आदि 

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धन्यवाद् 

🚂 रेलवे जोन के मुख्यालय 🚂

इस पोस्ट में मैंने रेलवे के सभी जोन के मुख्यालयों को बताने की कोशिश की है। 

1. दक्षिण रेलवे  (South) - चेन्नई

2. दक्षिण पूर्व रेलवे (South East) - कोलकाता

3. दक्षिण मध्य (South Central) - सिकंदराबाद

4. दक्षिण पूर्व मध्य (Southeast Central) - बिलासपुर

5. दक्षिण पश्चिम रेलवे (South West) - हुबली

6. पूर्व रेलवे (East) - कोलकाता

7. पूर्व मध्य (East Middle)  - हाजीपुर

8. पूर्व तटीय (East Coast) -  भुवनेश्वर

9. पश्चिम रेलवे (West) - मुंबई

10. मध्य रेलवे (Central) - मुंबई

11. उत्तर रेलवे (North) - दिल्ली

12. उत्तर मध्य रेलवे (North Central) - इलाहाबाद

13. उत्तर पश्चिम (North West) - जयपुर

14. पश्चिम मध्य रेलवे (West Central) - जबलपुर

15. पूर्वोत्तर रेलवे (North East) - गोरखपुर

16. पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे   - मालिगांव (गुवाहाटी) 

17. कोलकाता मेट्रो -  कोलकाता

18. दक्षिण तट रेलवे -विशाखापट्टनम (New 27 july 2019)

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Important Questions Level 2 Reet SST Free Mock Test Paper : 50

By the participating in this test series you will improved your knowledge and get good score in Rajasthan REET/RTET exam 2020. In this Reet SST Free Mock Test, we have included important Rajasthan GK, Psychology, English, Sanskrit, Social Science, Hindi and other subjects Questions with answers and explanation. 

Directions: 

  1. Read the following Reet SST Free Mock Test carefully and answer the question based on it.
  2. Try to solve all Questions in given time. 
  3. Total number of questions : 32
  4. Time alloted : 30 minutes.
  5. Each question carry 1 mark, no negative marks.

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Created on 
REET LEVEL 2 EXAM QUIZ 50
Best of Luck for Quiz
  1. Reet Exam 2020 Test Series 
  2. School Lecturer Exam 2020 Test Series
  3. RAJASTHAN POLICE EXAM TEST SERIES
विशेष अनुरोध :- 
  1. आपको टेस्ट सीरीज अच्छा लगा हो तो अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताये ताकि वो भी इसका फायदा ले सके
  2. Test में कही भी कोई त्रुटि हो तो कमेंट करके जरुर बताये
  3. टेस्ट की गुणवत्ता के बारे में आपका कोई भी सुझाव हो तो जरुर बताये ताकि हम इसको और बेहतर कर सके आपकी अति कृपा होगी