राजस्थान की प्रमुख पंचवर्षीय योजनाएं

राजस्थान की पंचवर्षीय योजनाएं - यहां पर राजस्थान की पहली  पंचवर्षीय योजना, दूसरी  पंचवर्षीय योजना, तृतीय  पंचवर्षीय योजना, चतुर्थ  पंचवर्षीय योजना, 5 वीं  पंचवर्षीय योजना, छठी  पंचवर्षीय योजना, 7 वीं  पंचवर्षीय योजना, 8 वीं  पंचवर्षीय योजना, 9 वीं  पंचवर्षीय योजना, 10 वीं  पंचवर्षीय योजना, 11 वीं  पंचवर्षीय योजना, 12 वीं  पंचवर्षीय योजना तथा 13 वीं  पंचवर्षीय योजना से सम्बंधित आंकड़े दिए गए है।

राजस्थान की प्रमुख पंचवर्षीय योजनाएं

① प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-56) -

प्रथम पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य के अन्तर्गत कृषि उत्पादन में वृद्धि करना, शक्ति के साधनों को बढ़ाना, जलापूर्ति की व्यवस्था करना, सिंचाई की सुविधाओं का विस्तार करना तथा मूलभूत सामाजिक सेवाओं का विस्तार करने के लिए शिक्षा प्रदान करना था। खाद्यान्न का उत्पादन 3.30 लाख टन बढ़ गया, साथ ही कपास का उत्पादन लक्ष्य से अधिक हुआ। इस योजना काल में सिंचित क्षेत्र 15.93 लाख हैक्टेयर हो गया और विद्युत उत्पादन 34,000 किलोवाट हो गया। सड़कों की लम्बाई 13,988 मील हो गई। इसी पंचवर्षीय योजना के दौरान चम्बल एवम् भाखड़ा नाँगल बहुउद्देश्यीय योजनाओं के अलावा 11 वृहद् व मध्यम परियोजनाओं तथा 244 लघु एवम् सिंचाई परियोजनाओं पर कार्य शुरू किए गए।

② दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) -

द्वितीय पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की अत्यधिक मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना था जो प्रथम योजनाकाल में पूर्ण की जानी थी। विद्युत की प्रस्तावित क्षमता 138.8 मेगावाट आवंटित की गई। प्रथम रूप से शक्ति एवम् सिंचाई पर इस योजनाकाल में ध्यान दिया गया। इसके साथ ही भूमि सुधार कार्यक्रम, सामाजिक सेवाओं के विकास, कृषि एवम् औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि और राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के विकास पर अधिक बल दिया गया। 1960-61 में खाद्यान्नों का वास्तविक उत्पादन 45.4 लाख टन हुआ। 

③ तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-66) -

इस तृतीय पंचवर्षीय योजना को वित्तीय साधनों की कमी के कारण दो भागों में विभक्त किया गया- प्रथम—महत्त्वपूर्ण परियोजनाएँ जिन पर 209 करोड़ रुपये व्यय किए जाने थे और, द्वितीय - अन्य कार्यक्रम जो उस समय प्रारम्भ किए जाने थे। इस योजनाकाल के दौरान देश को पाकिस्तान (1965) तथा चीन (1962) के विरुद्ध दो युद्ध झेलने पड़े। इस कारण देश व राज्य की आर्थिक व्यवस्था काफी प्रभावित हुई। कुल सिंचित क्षेत्र 1960-61 में 43.38 लाख एकड़ था, वह 1965-66 में बढ़कर 51.41 लाख एकड़ हो गया। इस योजनाकाल में विकास कार्यक्रमों पर वास्तविक व्यय 212.63 करोड़ रुपये हुआ और प्रस्ताव राशि 236 करोड़ रुपये योजना के लिए प्रस्तावित थी। इस योजना के अन्त में विद्युत क्षमता 65 मेगावाट से बढ़कर 96 मेगावाट हो गई। 1965-66 में राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय 385 रुपये थी। तीन एकवर्षीय योजनाएँ (1966-69)—भारत में आपातकालीन स्थिति को देखते हुए चौथी पंचवर्षीय योजना को स्थगित करना पड़ा और उसके स्थान पर वार्षिक योजना का सम्पादन ही देश के लिए हितकर समझा गया।

④ चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (1969-74) -

इस चौथी पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत विकास कार्यों पर 306.21 करोड़ रुपये प्रस्ताव में लाए गए परन्तु वास्तविक व्यय 308.79 करोड़ रुपये हुआ। राज्य में सूखा सम्भाव्य क्षेत्र, डेयरी विकास व कमाण्ड क्षेत्र विकास कार्यक्रमों को शुरू किया गया। इस योजना में क्षेत्र विकास की अवधारणा पर बल देते हुए पुनः सर्वोच्च प्राथमिकता सिंचाई और शक्ति को ही दी गई। सिंचाई एवम् शक्ति को ऊँची प्राथमिकता देने का कारण कृषि एवम् उद्योगों को बढ़ाना था। राज्य में केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनियोग की राशि 1966-69 में 17 करोड़ रुपये से बढ़कर 1973-74 में 100 करोड़ हो गई। राजस्थान राज्य की इस योजना से विद्युत क्षमता 174 मेगावाट से बढ़कर 452 मेगावाट हो गई। 1968-69 में कुल सिंचाई क्षेत्रफल 21.2 हैक्टेयर था जो बढ़कर 1973-74 में 26.2 लाख हैक्टेयर हो गया।

⑤ पाँचवीं पंचवर्षीय योजना (1974-78)—

इस योजना काल में 847.16 करोड़ रुपये व्यय करने का प्रावधान था किन्तु वास्तविक व्यय इससे कहीं अधिक 857.16 करोड़ रुपये का हुआ। इस योजना में भूमिगत जल को विशेष रूप से प्रयोग करने पर जोर दिया गया, क्योंकि राज्य में सतह के जल की मात्रा सीमित है। क्षेत्रिय विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत जनजाति क्षेत्र के लिए एक विशिष्ट योजना का निर्माण किया जाने लगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य विकास को बढ़ाने के लिए आर्थिक आधार मजबूत करना था। कुल सड़क की लम्बाई 40,339 किलोमीटर हो गई। इस दौरान न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम शुरू किया गया। सकल सिंचित क्षेत्रफल 30.4 लाख हैक्टेयर हो गया। विद्युत प्रस्तावित क्षमता 800.78 मेगावाट से बढ़कर 959.60 मेगावाट हो गई।

⑥ छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85)—

इस छठी पंचवर्षीय योजना की शुरूआत 1 अप्रैल, 1980 को हुई। इस योजना की अनुमोदित व्यय राशि 2025 करोड़ रुपये थी, किन्तु इसमें वास्तविक व्यय 2130.70 करोड़ रुपये हुए। छठी योजना के दौरान विद्युत क्षमता 1713.17 मेगावाट हो गई। इस योजना के अन्त तक 58 प्रतिशत गाँव विद्युतीकृत हो चुके थे। इस योजना में निर्धानता निवारण हेतु समन्वित ग्रामीण विकास कार्यक्रम 'राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम एवम् ग्रामीण भूमिहीन श्रमिक रोजगार गारन्टी कार्यक्रम' आरम्भ किए गए। राज्य में कृषि उत्पादनों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई।

⑦ सप्तमी पंचवर्षीय योजना (1985-90) -

राजस्थान में सातवीं पंचवर्षीय योजनावधि में 3016.2 करोड़ रुपये व्यय हुए। इस योजना में उत्पादक रोजगार के सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। इस योजना में आर्थिक प्रगति के अन्तर्गत उतार-चढ़ाव आते रहे। खाद्यान्नों का उत्पादन 1987-88 में 48 लाख टन था जो वर्ष 1988-89 में बढ़कर 106.6 लाख टन हो गया। विद्युत शक्ति की प्रस्तावित क्षमता वर्ष 1989-90 के अन्त तक 2711.42 मेगावाट तक पहुंच गई। राज्य में 1980-81 के मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय 1397 रुपये से बढ़कर 1742 रुपये हो गयी। इस योजनाकाल में ग्रामीण उद्योगों का उत्पादन 120 करोड़ रुपये से अधिक रिकॉर्ड किया गया। सड़कों की कुल लम्बाई 56,956 किमी. हो गई। वार्षिक योजनाएँ (1990-1992) सातवीं योजना की समाप्ति पर 1 अप्रैल, 1990 से देश की आठवीं पंचवर्षीय योजना शुरू नहीं की जा सकी।  राज्य में अच्छी वर्षा के कारण खाद्यान्न का उत्पादन रिकार्ड 108.68 लाख टन हुआ। राजस्थान राज्य में देश की भाँति 1990-91 एवम् 1991-92 की दो वार्षिक योजनाएँ बनाई गईं। वर्ष 1990-91 की योजना पर 975.6 करोड़ रुपये एवम् 1991-92 में 1178.5 करोड़ रुपये की राशि व्यय हुई। राज्य में विद्युत की स्थापित क्षमता 1991-92 में 2775 मेगावाट हो गई। 1 जनवरी, 1991 से 'अपना गाँव अपना काम' योजना लागू की गई। प्रवासी राजस्थानियों से राज्य के विकास में योगदान प्राप्त करने के लिए 'राजस्थान विकास कोष' की स्थापना की गई।

⑧ आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-1997) - 

आठवीं पंचवर्षीय योजनाकाल में राज्य के विकास हेतु औद्योगिक नीति, 1994, नई खनिज नीति 1994 तथा सड़क विकास नीति, 1994 लागू की गई। राज्य का आठवीं योजना में सार्वजनिक क्षेत्र में वास्तविक व्यय लगभग 11998.97 करोड़ रुपये हुआ। योजना में कुल परिव्यय राशि का 45% अंश सिंचाई एवम् शक्ति पर व्यय किया गया। जिसमें प्रस्तावित व्यय का लगभग 62% ग्रामीण क्षेत्रों के विकास पर, 12.5% न्यूनतम आवश्यकता कार्यक्रम पर व्यय हुआ। आठवीं योजना में 15 नए महाविद्यालय जिनमें 11 महाविद्यालय महिलाओं के लिए खोले गए, 5830 प्राथमिक विद्यालय,2649 उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले गए। जनजातीय विकास के लिए इस योजना के अन्तर्गत 1535 करोड़ रुपये व्यय किए गए।

⑨ नवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002) -

राज्य की नवीं योजना का आकार आठवीं योजना के आकार से दुगुने से भी अधिक है। योजनाकाल में 27,500 करोड़ रुपये का सार्वजनिक परिव्यय स्वीकृत किया गया। नवीं योजना में आर्थिक विकास के लिए आधारभूत ढाँचे का विकास करना। निर्यात प्रोत्साहन पर बल देना। समाज के पिछड़े वर्ग को ऊपर उठाना। अधिक रोजगार देने वाले क्षेत्रों का विकास करना। मानवीय साधनों व क्षमता का विकास करना। इस तरह नवीं योजना में सम्पूर्ण रूप से निर्यात को बढ़ाने, सामाजिक क्षेत्र का विकास करने, आर्थिक ढाँचे को मजबूत करने, जल-संसाधनों के बेहतर उपयोग सम्बन्धी बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दिया गया है।

⑩ राजस्थान की दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002- 2007) -

  • समय- 1अप्रेल 2002 ई.से 31 मार्च 2007 ई.
  • इसमें 31831.75 करोड़ रूपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था। जबकि 33735.74 करोड़ रूपये खर्च हुए।
  • राज्य की वार्षिक योजना (2003-2004) - राज्य की वार्षिक योजना 2003-2004 का आकार 4,258.00 करोड़ रुपए था, जिसे संशोधित कर 4370.80 करोड़ रुपए कर दिया गया जो कि राज्य की वर्ष 2002-03 की वार्षिक योजना 5622.92 से 1364.92 करोड़ रुपये कम है। राज्य की वार्षिक योजना 2003-04 में सर्वाधिक प्रस्तावित व्यय 1564.52 करोड़ रु, सामाजिक एवं सामुदायिक सेवाओं पर रखा है जो कि प्रस्तावित योजना का 36.74 प्रतिशत है।

⑪ राजस्थान की 11वीं पंचवर्षीय योजना (2007-2012) -

  • समय - 1अप्रेल 2007 ई.से 31 मार्च 2012 ई.
  • इसमें 71731.38 करोड रूपये की राशि खर्च करने का लक्ष्य रखा गया। जिसमें आर्थिक विकास का लक्ष्य 7.4 प्रतिशत निर्धारित किया गया।
  • ऊर्जा क्षेत्र में - 35.70 प्रतिशत
  • परिवहन - 6.53 प्रतिशत
  • सामाजिक व सामुदायिक सेवाएँ-27.49 प्रतिशत
  • सिंचाई व बाढ़ नियंत्रण - 10.18 प्रतिशत
  • कृषि व सम्बद्ध सेवाएं - 3.1 प्रतिशत
  • वास्तविक व्यय -  93950.73
  • सामान्य सेवाएं -  6.10 प्रतिशत
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रम -  5.99 प्रतिशत
  • प्राथमिक क्षेत्र में 3.5 प्रतिशत, द्वितीय क्षेत्र में 8 प्रतिशत तथा तृतीय क्षेत्र में 8.9 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया जो औसत 7.4 प्रतिशत था।


⑫ राजस्थान की 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) -

  • 6 इसमें 196992 करोड रूपये की राशि खर्च करने का लक्ष्य रखा गया। जिसमें आर्थिक विकास का लक्ष्य 7.70 प्रतिशत निर्धारित किया गया।
  • यह ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के अनुमोदित व्यय की तुलना में 174 प्रतिशत अधिक है।
  • ऊर्जा क्षेत्र में -  36.92 प्रतिशत
  • परिवहन -  5.28 प्रतिशत
  • सामान्य सेवाएं -  .88 प्रतिशत
  • सामाजिक व सामुदायिक सेवाएं -  35.28 प्रतिशत
  • सिंचाई व बाढ नियंत्रण -  3.99 प्रतिशत
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रम -  9 प्रतिशत
  • उद्योग व खनिज में -  0.50 प्रतिशत
  • वैज्ञानिक सेवाओं में -  0.12 प्रतिशत
  • कृषि व सम्बद्ध सेवाएं - 5.57 प्रतिशत
  • विशिष्ट क्षेत्रीय कार्यक्रम में - 0.59 प्रतिशत
  • आर्थिक सेवाओं में -  1.87 प्रतिशत
  • प्राथमिक क्षेत्र में 3.0 प्रतिशत, द्वितीय क्षेत्र में 8 प्रतिशत तथा तृतीय क्षेत्र में 9.5 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया जो औसत 7.70 प्रतिशत था।